रविवार, 1 जून 2014

पीएमओ

- कहते हैं कि देश पीएमओ से चलता है। वाकई यहां से सब मंत्रालयों पर नजर रखी जाती है। पीएमओ साउथ ब्लॉक में है, जहां उसके हिस्से कुल 20 कमरे हैं। ये तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। पीएमओ में देश के प्रधानमंत्री के दो सबसे अहम ऑफिसर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रिंसिपल सेक्रटरी के अलावा, तमाम दूसरे ऑफिसर होते हैं। नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को अपना राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया है। आमतौर पर इस पद पर प्रधानमंत्री अपने बेहद खासमखास शख्स को रखते हैं। एक ऐसा शख्स, जिसे सुरक्षा संबंधी मामलों की गहरी समझ हो। दूसरी ओर, प्रिंसिपल सेक्रटरी खांटी ब्यूरोक्रेट होता है, जिसे ब्यूरोक्रेसी का लंबा अनुभव होता है। वह सभी मंत्रालयों के काम-काज की जानकारी प्रधानमंत्री को देता है। उसके साथ खासा स्टाफ रहता है।
- पीएमओ में प्रधानमंत्री के प्राइवेट सेक्रटरी, मीडिया अडवाइज़र समेत बड़ी संख्या में स्टाफ होते हैं। आप पीएमओ को प्रधानमंत्री का सचिवालय भी कह सकते हैं। पीएमओ में भ्रष्टाचार निरोधक इकाई भी काम करती है। यहां पर जनता के मसलों को सुनने के लिए एक अलग से विभाग है। वास्तव में प्रधानमंत्री अपने इसी दफ्तर के जरिए अपनी सरकार के तमाम मंत्रालयों और गवर्नरों के काम-काज पर नजर रखते हैं।

- जिन विभागों को प्रधानमंत्री देख रहे होते हैं, उनसे संबंधित संसद में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब भी पीएमओ में ही तैयार होते हैं। इन्हें उस विभाग के राज्य मंत्री के सहयोग से पीएमओ में तैयार किया जाता है। जिन सवालों के जवाब संसद में प्रधानमंत्री को देने होते हैं, उन्हें वह खुद पीएमओ में पहले देखते भी हैं। इसके अलावा, पीएमओ से ही प्रधानमंत्री राहत कोष और राष्ट्रीय सुरक्षा कोष भी चलता है। यानी देश पीएमओ के हिसाब से ही चलता है।

- हैरानी की बात यह है कि इस जमाने में भी पीएमओ को रोजाना करीब दो हजार खत आते हैं। इनमें से 75 प्रतिशत पोस्ट कार्ड होते हैं। पहले प्रधानमंत्री के पास आने वाले सारे पत्र निर्माण भवन के डाकघर में आते थे,लेकिन अब पीएमओ में एक डाकघर भी काम करने लगा है।

- चूंकि पीएमओ के ऊपर काफी व्यापक जिम्मेदारियां होती हैं, इसलिए देश के आम बजट में इसके लिए अलग से रकम तय की जाती है। 2013-14 के आम बजट में पीएमओ के लिए 32.22 करोड़ रुपए रखे गए। महाराष्ट्र कैडर के पूर्व आईएएस ऑफिसर जफर इकबाल कहते हैं कि पीएमओ के पास तमाम तरह के काम होते हैं। ऐसे में यह रकम कोई बहुत नहीं मानी जा सकती।