रविवार, 29 नवंबर 2009

शीघ्र दूर होंगी एटमी डील की बाधाएं

भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के तहत एक को छोड़कर करार से जुड़े तमाम मुद्दों को सुलझा लिया गया है और वार्ता अंतिम चरण में है।परमाणु ऊर्जा पुन: प्रसंस्करण से संबंधित एक अहम करार दो सप्ताह के भीतर ही पूरा होने की उम्मीद है। भारत को इस्तेमाल किए गए परमाणु ईधन के दोबारा प्रसंस्करण की सुविधा मुहैया हो जाएगी। सारी जद्दोजहद पुन: प्रसंस्करण को निलंबित किए जाने की शर्त और मापदंड तय करने पर हो रही है।  केवल एक मुद्दा बचा है जो विधिक प्रारूप को अंतिम रूप देने से संबंधित है।
भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार को अमलीजामा पहनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के सुरक्षा मापदंडों के तहत पुन: प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना एक महत्वपूर्ण जरूरत है।
समझौते के मार्ग में आड़े आ रहे दो प्रमुख मुद्दों को सुलझा लिया गया है। लगभग तय हो गया है कि कितने संयंत्र स्थापित किए जाने चाहिए और इनकी सुरक्षा किस प्रकार की रहनी चाहिए। जानकारी मिली है कि अमेरिका की कोशिश बहुउपयोगी प्रतिष्ठान स्थापित करने की है। इसके लिए उसने तर्क यह दिया था कि अमेरिका द्वारा भारत में परमाणु संयंत्रों की स्थापना शुरू किए जाने के बाद पुन:प्रसंस्करण का काम बढ़ेगा और अधिक प्रतिष्ठान होने से अमेरिका को फायदा होगा। सुरक्षा के बारे में अमेरिका की तर्ज पर संरक्षात्मक प्रणाली स्थापित किए जाने पर सहमति बनी है। तीसरा अहम मसला यह था कि क्या किसी भी समय पुन: प्रसंस्करण को निलंबित किया जा सकता है और किन परिस्थितियों में तथा किस शर्त पर? सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्ष इस मामले में आपसी रूप से स्वीकार्य विधिक प्रारूप पर काम कर रहे हैं। 
पुन: प्रसंस्करण प्रतिष्ठान का इस्तेमाल केवल अमेरिकी ईधन के लिए किया जाएगा, सूत्रों ने बताया कि यह प्रतिबद्धता केवल अमेरिकी ईधन के बारे में है। दूसरे देशों के पुन: प्रसंस्करण ईधन के बारे में कोई मसला नहीं है .

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें