रविवार, 29 नवंबर 2009

नक्सलवादी खतरा

अमेरिका की एक प्रमुख संस्था स्ट्राटफोर ने दावा किया है कि भारत सरकार के ग्रमीण क्षेत्रों की अनदेखी के कारण वामपंथी अलगाववाद की समस्या उत्पन्न हो गई है और यह देश की सुरक्षा के समक्ष गंभीर खतरा है। स्ट्राटफोर ने नक्सलवादी खतरे से निपटने के अभियान में लगे सुरक्षा बलों की क्षमता पर भी संदेह उठाया है। स्ट्राटफोर ने कहा कि नक्सलवादी खतरा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष सबसे गंभीर खतरा है। आज अलगाववाद का जो स्वरूप हम देख रहे हैं, वह दशकों तक भारत सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा का परिणाम है। इससे नक्सलवादियों को अपना अभियान चलाने के लिए उर्वर जमीन तैयार मिली है और उन्होंने इसका उपयोग अलगाववादी गतिविधियों की रणनीति के लिए किया है। भल्ला ने कहा कि ग्रामीण भारत में बिना सतत विकास गतिविधियों के नक्सलवादी समस्याएं बनी रहेंगी। भारत के आंतरिक सुरक्षा बल इन खतरों का सामना करने के लिए पूरी तरह से उपकरणों से लैस नहीं हैं। छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार समेत 20 राज्यों को नक्सल चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। माओवादी हिंसा के तेजी से पांव पसारने की बात को स्वीकार करते हुए केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै ने हाल ही में संसद की स्थाई समिति की बैठक में स्वीकार किया कि नक्सल प्रभावित राज्यों में 40 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि नक्सलवाद देश के 20 राज्यों में फैल गया है और इससे देश के 223 जिलों में 2,000 पुलिस स्टेशन के इलाके आंशिक या व्यापक रूप से प्रभवित हैं। 

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