परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर और केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने बताया कि किसी ने गत 24 नवंबर को जान-बूझ कर संयंत्र के वाटर कूलर में रेडियोएक्टिव पदार्थ ट्राइटियम (हाइड्रोजन का एक रूप, जिसका इस्तेमाल शोध, फ्यूजन रिएक्टरों और न्यूट्रान जेनेरेटरों में किया जाता है।) मिलाया था। इस वजह से 55 कर्मचारी विकिरण के शिकार हो गए। नियमित जांच में उनके शरीर में ट्राइटियम की मात्रा बढ़ी पाई गई।
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ा जिले में स्थित कैगा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की तीन इकाइयां काम कर रही हैं, जबकि चौथी इकाई अभी बन रही है। भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम द्वारा संचालित यह संयंत्र 1989 में बना और 16 नवंबर, 2000 से इसमें बिजली बनने लगी। इसकी तीनों इकाइयों की क्षमता 220-220 मेगावाट की है। दो नंबर और तीन नंबर की इकाई से बिजली उत्पादन हो रहा है। एक नंबर की इकाई रखरखाव के लिए 20 अक्टूबर से बंद है। इसी इकाई के वाटर कूलर में ट्राइटियम मिलाया गया।
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