शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

छोटे राज्यों की मांग

तेलंगाना राज्य के गठन का रास्ता खोलने की केंद्र की घोषणा ने हरित प्रदेश, बुंदलेखंड व विदर्भ जैसे छोटे राज्यों की मांग को हवा दे दी है। टीआरएस के आंदोलन के आगे केंद्र के कंधा झुकाने से उन दलों को नई ऊर्जा मिलेगी जो अलग प्रदेश का सपना दिखाकर क्षेत्र विशेष में सियासत सींच रहे हैं। केंद्र चाहे तेलंगाना के मामले को दूसरे नए राज्यों की मांग से अलग ठहराए, मगर ताजा घटनाक्रम से छोटे राज्यों की सियासत करने वाले दलों को आधार तो मिल ही गया है। कुछ रणनीतिकार मानते भी हैं कि कुछ हद तक छोटे राज्यों की मांग की सियासत जोर पकड़ेगी। इनमें विदर्भ, हरित प्रदेश, बुंदेलखंड और गोरखालैंड की मांग सबसे मुखर होने का खतरा है। तेलंगाना के बाद सबसे पुरानी मांग महाराष्ट्र से अलग नए विदर्भ राज्य की रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों अलग विदर्भ से सहमत हैं। अकेले शिवसेना ही खिलाफ है, लेकिन विदर्भ के पक्ष या विपक्ष में जो एक अहम बात है वह किसी क्षेत्रीय पार्टी का न होना। उत्तरप्रदेश के पश्चिमी हिस्से को हरित प्रदेश बनाने का एजेंडा रालोद नेता अजित सिंह की सियासत की बुनियाद है। गन्ना किसानों के ताजा आंदोलन की कामयाबी से गदगद अजित के लिए यह मुद्दा छींका टूटने से कम नहीं है,मगर सपा और बसपा इसके हक में नहीं। कांग्रेस व भाजपा भी बंटवारे की हिमायती नहीं। फिर भी अजित की हरित प्रदेश की उम्मीदें हिलोरें मार सकती हैं। यानि केंद्र पर दबाव डालो और राज्य निर्माण का रास्ता खोलो। बुंदेलखंड की मांग वहां की जनता से ज्यादा सियासी दलों की है। यूपी-एमपी के इलाकों को मिलाकर इस नए राज्य की मांग से तो कांग्रेस भी सहानुभूति रखती है। इनके अलावा चौथा मजबूत दावा गोरखालैंड का है। इसको लेकर दशकों से आंदोलन होते रहे हैं और गोरखा पर्वतीय परिषद का गठन भी हो चुका है। इस मांग से न पश्चिम बंगाल की मुख्य सत्ताधारी पार्टी माकपा इत्तेफाक रखती और न ही कांग्रेस, लेकिन गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने नए राज्य की लौ नहीं बुझने दी। अब उसकी उम्मीदों के दीये में भी तेलंगाना ने और तेल डाल दिया है। नए राज्यों की अन्य मांगें उतनी गंभीर नहीं हैं। इसमें यूपी में पूर्वाचल तो बिहार में मिथिलांचल और भोजपुर बनाने की मांगें शामिल हैं। गुजरात में अलग सौराष्ट्र प्रदेश बनाने की भी यदा-कदा आवाज उठती है,मगर इनकी गंभीरता कभी नहीं रही, लेकिन तेलंगाना के बाद इन आवाजों को ताकत मिलेगी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें