शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना

 केंद्र सरकार ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना में भ्रष्टाचार के आरोपों को नकारते हुए सुप्रीम कोर्ट को खूबियां गिनाई हैं। सरकार ने कहा है कि पारदर्शिता व जवाबदेही योजना की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसमें सांसदों की भूमिका केवल सिफारिश तक सीमित है, निगरानी और सुधार के तमाम उपायों के साथ क्रियान्वयन का अधिकार जिला प्रशासन के पास होता है। योजना को सूचना कानून के तहत लाया गया है और इसके खर्च का ब्योरा ऑनलाइन देखा जा सकता है। ये सारी बातें सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कही हैं। सरकार ने कहा है कि सांसद निधि योजना के तहत सांसदों को दो करोड़ रुपये के आवंटन से भ्रष्टाचार को बढ़ावे के आरोप निराधार हैं। धन चुनाव क्षेत्र के ढांचागत विकास के लिए दिया जाता है। सांसद तो सिर्फ काम की सिफारिश करते हैं, तकनीकी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तो जिला प्रशासन के पास होते हैं। केंद्र व राज्य सरकारें जिला प्रशासन के काम की निगरानी करती हैं और क्रियान्वयन में खामी पर तुरंत कार्रवाई होती है। सरकार ने कहा है कि गत वर्ष के खर्च का उपयोग प्रमाणपत्र व उसके भी एक साल पहले का ऑडिट प्रमाणपत्र देखने के बाद ही आगे का धन जारी किया जाता है। कार्यदाई संस्था के लिए प्रशासन को काम पूरा होने की रिपोर्ट देना भी अनिवार्य कर दिया गया है। पारदर्शिता के लिए योजना के क्रियान्वयन को सूचना अधिकार के दायरे में लाया गया है। योजना में निगरानी के लिए कई साल पहले ही एक साफ्टवेयर विकसित किया गया था जिसमें एक लाख रुपये तक के काम का ब्योरा डाला जाता है जिसे ऑन लाइन देखा जा सकता है

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